Saturday, January 31, 2026
HomeLifestyleसावन माह में महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं?

सावन माह में महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं?

सावन माह में महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं जिसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। हरा रंग प्रकृति, समृद्धि और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका संबंध न केवल शिव भक्ति से है, बल्कि स्वास्थ्य लाभ और सामाजिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है।

इस लेख में हम जानेंगे कि सावन के महीने में महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं और इस परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक कारण क्या हैं।

1. धार्मिक महत्व (सावन माह में महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं)

भगवान शिव और हरे रंग का संबंध:

सावन माह को भगवान शिव का महीना माना जाता है। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं हरी चूड़ियां धारण करती हैं। हरा रंग प्रकृति और शिव के नीलकंठ रूप से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को शिवजी ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका गला नीला पड़ गया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। हरा रंग, नीले रंग के समीप होने के कारण शिव की कृपा का प्रतीक माना जाता है।

2 4

माँ पार्वती की कृपा पाने के लिए:

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। सावन माह में हरी चूड़ियां पहनने से माँ पार्वती प्रसन्न होती हैं और सुहाग की रक्षा करती हैं। इसीलिए विवाहित महिलाएं हरी चूड़ियां पहनकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक:

: सावन माह में प्रकृति हरी-भरी हो जाती है जो शिव और पार्वती के मिलन का प्रतीक है। हरी चूड़ियां इसी पवित्र बंधन को दर्शाती हैं।

2. वैज्ञानिक कारण

हरा रंग मन को शांत करता है:

विज्ञान के अनुसार, हरा रंग आंखों और मस्तिष्क के लिए सबसे अधिक सुखदायक होता है। यह तनाव को कम करके मन को शांति प्रदान करता है। सावन माह में हरी चूड़ियां पहनने से महिलाओं का मन प्रसन्न रहता है और वे अधिक सकारात्मक महसूस करती हैं।

3 4

कांच की चूड़ियों का स्वास्थ्य लाभ:

पारंपरिक रूप से हरी चूड़ियां कांच की बनी होती हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक मानी जाती हैं। कांच में प्राकृतिक खनिज होते हैं, जो शरीर के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखते हैं। साथ ही, कांच की चूड़ियों के घर्षण से हाथों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबते हैं, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है।

मौसमी बीमारियों से बचाव:

सावन माह में वर्षा ऋतु होने के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हरा रंग प्रकृति से जुड़ा होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

3. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

3. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व:

5 1

हिंदू समाज में चूड़ियां सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। विवाहित महिलाएं हरी चूड़ियां पहनकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। सावन में हरी चूड़ियां पहनने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक:

हरा रंग समृद्धि और उत्सव का रंग माना जाता है। सावन में हरी चूड़ियां पहनने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

परंपरा का निर्वहन:

भारतीय संस्कृति में परंपराओं का विशेष महत्व है। सावन में हरी चूड़ियां पहनना एक पुरानी परंपरा है जिसे आज भी महिलाएं निभाती हैं।

4. अन्य मान्यताएं

6 1

हरियाली तीज का संबंध:

सावन माह में हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें महिलाएं हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं। यह त्योहार पति-पत्नी के पवित्र बंधन को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

प्रकृति से जुड़ाव:

सावन में प्रकृति हरी-भरी हो जाती है। हरी चूड़ियां पहनकर महिलाएं प्रकृति के साथ अपना जुड़ाव महसूस करती हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments